श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 41: सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  4.41.34-35h 
तत्र नेत्रमन:कान्त: कुञ्जरो नाम पर्वत:॥ ३४॥
अगस्त्यभवनं यत्र निर्मितं विश्वकर्मणा।
 
 
अनुवाद
'तब कुंजर नामक पर्वत दिखाई देगा, जो नेत्रों और मन को अत्यंत सुखदायक है। उसके ऊपर विश्वकर्मा द्वारा निर्मित महर्षि अगस्त्य का सुंदर भवन है।'
 
‘Then the mountain named Kunjar will be visible, which is very pleasing to the eyes and the mind. On top of it is a beautiful building of Maharishi Agastya* built by Vishwakarma. 34 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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