श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 41: सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.41.27 
एवं नि:संशयान् कृत्वा संशयान्नष्टसंशया:।
मृगयध्वं नरेन्द्रस्य पत्नीममिततेजस:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार लंका द्वीप के समस्त संदिग्ध स्थानों की खोज करके जब तुम उन्हें संदेहरहित पाओ और तुम्हारे मन का संदेह दूर हो जाए, तब तुम लंका द्वीप से आगे बढ़कर यशस्वी राजा श्री रामजी की पत्नी की खोज करो॥ 27॥
 
After searching in this manner in all the doubtful places in that island of Lanka, when you find them to be free from doubts and the doubts in your mind are dispelled, then you should proceed beyond the island of Lanka and search for the wife of the illustrious King Shri Ram.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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