श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 41: सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  4.41.17-18h 
सा चन्दनवनैश्चित्रै: प्रच्छन्नद्वीपवारिणी॥ १७॥
कान्तेव युवती कान्तं समुद्रमवगाहते।
 
 
अनुवाद
उसके द्वीप और जल विचित्र चंदन पुष्पों से आच्छादित हैं; इसलिए सुन्दर साड़ी से सुसज्जित युवती प्रेमिका की भाँति अपने प्रियतम समुद्र से मिलती है॥17 1/2॥
 
‘Its islands and waters are covered with strange sandalwood flowers; hence the young woman adorned with a beautiful sari meets her beloved ocean like a lover.॥ 17 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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