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श्लोक 4.41.17-18h  |
सा चन्दनवनैश्चित्रै: प्रच्छन्नद्वीपवारिणी॥ १७॥
कान्तेव युवती कान्तं समुद्रमवगाहते। |
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| अनुवाद |
| उसके द्वीप और जल विचित्र चंदन पुष्पों से आच्छादित हैं; इसलिए सुन्दर साड़ी से सुसज्जित युवती प्रेमिका की भाँति अपने प्रियतम समुद्र से मिलती है॥17 1/2॥ |
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| ‘Its islands and waters are covered with strange sandalwood flowers; hence the young woman adorned with a beautiful sari meets her beloved ocean like a lover.॥ 17 1/2॥ |
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