श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 41: सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  4.41.13-14h 
अयोमुखश्च गन्तव्य: पर्वतो धातुमण्डित:।
विचित्रशिखर: श्रीमांश्चित्रपुष्पितकानन:॥ १३॥
सुचन्दनवनोद्देशो मार्गितव्यो महागिरि:।
 
 
अनुवाद
उसके बाद तुम अयोमुख (मलय) पर्वत पर जाओ जो अनेक धातुओं से सुशोभित है, जिसके शिखर अत्यंत अद्वितीय हैं। वह सुंदर पर्वत अद्वितीय पुष्पित वनों से सुशोभित है। उसके चारों ओर सुंदर चंदन के वन हैं। उस महान मलय पर्वत पर सीता की भली-भाँति खोज करो।
 
‘After that, go to Ayomukh* (Malay) mountain which is decorated with many metals, its peaks are very unique. That beautiful mountain is adorned with unique blooming forests. There are beautiful sandalwood forests in all its places. Search for Sita thoroughly on that great mountain Malay.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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