श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 41: सुग्रीव का दक्षिण दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए वहाँ प्रमुख वानर वीरों को भेजना  »  श्लोक 10-12
 
 
श्लोक  4.41.10-12 
विदर्भानृष्टिकांश्चैव रम्यान् माहिषकानपि॥ १०॥
तथा वङ्गान् कलिङ्गांश्च कौशिकांश्च समन्तत:।
अन्वीक्ष्य दण्डकारण्यं सपर्वतनदीगुहम्॥ ११॥
नदीं गोदावरीं चैव सर्वमेवानुपश्यत।
तथैवान्ध्रांश्च पुण्ड्रांश्च चोलान् पाण्डॺांश्च केरलान्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार विदर्भ, ऋष्टिक, रम्य महिष्क, वंग, कलिआंग और कौशिक आदि देशों में तथा पर्वतों, नदियों और गुफाओं सहित सम्पूर्ण दण्डकारण्य में खोज करो। वहाँ स्थित गोदावरी नदी में बार-बार देखो। इसी प्रकार आंध्र, पुण्ड्र, चोल, पाण्डव और केरल आदि देशों में भी खोज करो।
 
‘Similarly, search all over the countries like Vidarbha, Rishtik, Ramya Mahishka, Vanga*, Kalianga and Kaushik, and search the entire Dandakaranya including the mountains, rivers and caves. Look repeatedly in the Godavari river which is there. Similarly, search all over the countries like Andhra, Pundra, Chola, Pandava and Kerala.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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