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श्लोक 4.39.37  |
ततो दधिमुख: श्रीमान् कोटिभिर्दशभिर्वृत:।
सम्प्राप्तोऽभिनदंस्तस्य सुग्रीवस्य महात्मन:॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| इसके बाद श्री दधिमुख दस करोड़ वानरों के साथ गर्जना करते हुए किष्किंधा में महात्मा सुग्रीव के पास आये। 37॥ |
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| Thereafter, Shri Dadhimukh came roaring with ten crore monkeys to Mahatma Sugriva in Kishkindha. 37॥ |
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