श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 39: श्रीरामचन्द्रजी का सुग्रीव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना तथा विभिन्न वानरयूथपतियों का अपनी सेनाओं के साथ  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.39.30 
तत: पद्मसहस्रेण वृत: शङ्कुशतेन च।
युवराजोऽङ्गद: प्राप्त: पितुस्तुल्यपराक्रम:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् युवराज अंगद आए। वे अपने पिता के समान पराक्रमी थे। उनके साथ एक हजार पद्म और एक सौ शंकु (एक पद्म) वानरों की सेना थी (उनके सैनिकों की कुल संख्या दस शंख और एक पद्म थी)॥30॥
 
Then came the crown prince Angad. He was as valiant as his father. He had with him an army of one thousand Padmas and one hundred Shanku (one Padma) monkeys (the total number of his soldiers was ten Shankhs and one Padma).॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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