श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 39: श्रीरामचन्द्रजी का सुग्रीव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना तथा विभिन्न वानरयूथपतियों का अपनी सेनाओं के साथ  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.39.23 
तत: काञ्चनशैलाभो गवयो नाम यूथप:।
आजगाम महावीर्य: कोटिभि: पञ्चभिर्वृत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सुवर्णमय मेरु पर्वत के समान तेजस्वी और पराक्रमी युथपति गवय पाँच करोड़ वानरों के साथ प्रकट हुए॥23॥
 
Thereafter Yuthapati Gavaya, who was as bright and mighty as the golden mountain Meru, appeared with five crore monkeys. 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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