श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 39: श्रीरामचन्द्रजी का सुग्रीव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना तथा विभिन्न वानरयूथपतियों का अपनी सेनाओं के साथ  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  4.39.17-18 
पद्मकेसरसंकाशस्तरुणार्कनिभानन:।
बुद्धिमान् वानरश्रेष्ठ: सर्ववानरसत्तम:॥ १७॥
अनेकैर्बहुसाहस्त्रैर्वानराणां समन्वित:।
पिता हनुमत: श्रीमान् केसरी प्रत्यदृश्यत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् हनुमान जी के पिता एवं श्रेष्ठ श्री केसरी प्रकट हुए । उनके शरीर का रंग कमल के केसर के समान पीला और मुख प्रातःकालीन सूर्य के समान लाल था । वे अत्यंत बुद्धिमान और वानरों में श्रेष्ठ थे । वे हजारों वानरों से घिरे हुए थे । 17-18॥
 
Thereafter, Hanuman ji's father and the best Mr. Kesari appeared. The color of his body was yellow like the saffron of a lotus and his face was red like the morning sun. He was very intelligent and the best among all the monkeys. They were surrounded by thousands of monkeys. 17-18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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