श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.38.30 
शतै: शतसहस्रैश्च वर्तन्ते कोटिभिस्तथा।
अयुतैश्चावृता वीर शङ्कुभिश्च परंतप॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले शूरवीरों! इनमें से किसी के पास सौ, किसी के पास एक लाख, किसी के पास एक करोड़, किसी के पास अयुत (दस हजार) और किसी के पास शंकु नामक एक ही वानर है॥30॥
 
O brave souls who torment the enemies! Some of them have a hundred, some a lakh, some a crore, some ayuta (ten thousand) and some have a single monkey named Shanku.॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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