श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.38.3 
स लक्ष्मणो भीमबलं सर्ववानरसत्तमम्।
अब्रवीत् प्रश्रितं वाक्यं सुग्रीवं सम्प्रहर्षयन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् लक्ष्मणजी ने समस्त वानरों में सबसे अधिक उग्र एवं बलवान सुग्रीव का हर्ष बढ़ाते हुए उनसे इस प्रकार विनीत वचन कहे - 3॥
 
After that, Lakshman, increasing the joy of Sugriva, the fiercest and most powerful of all the monkeys, spoke to him with these humble words - 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd