श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.38.29 
देवगन्धर्वपुत्राश्च वानरा: कामरूपिण:।
स्वै: स्वै: परिवृता: सैन्यैर्वर्तन्ते पथि राघव॥ २९॥
 
 
अनुवाद
रघुनाथजी! जो देवता और गन्धर्वों के पुत्र हैं और इच्छानुसार रूप धारण करने में समर्थ हैं, वे श्रेष्ठ वानर अपनी-अपनी सेनाओं के साथ प्रस्थान करके इस समय मार्ग में आ रहे हैं॥ 29॥
 
Raghunaathji! Those best monkeys who are the sons of the gods and the Gandharvas and who are capable of assuming any form according to their will, have set out with their respective armies and are presently on the way.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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