श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.38.28 
ऋक्षाश्च वानरा: शूरा गोलाङ्गूलाश्च राघव।
कान्तारवनदुर्गाणामभिज्ञा घोरदर्शना:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘रघुनंदन! उनमें भालू, वानर और वीर लंगूर भी हैं। वे सभी बड़े डरावने लगते हैं और बीहड़ वनों तथा दुर्गम स्थानों के विशेषज्ञ हैं।॥ 28॥
 
‘Raghunandan! Among them are bears, monkeys and valiant langurs. All of them look very scary and are experts of rugged forests and inaccessible places.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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