श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.36.8 
सहायकृत्यं किं तस्य येन सप्त महाद्रुमा:।
गिरिश्च वसुधा चैव बाणेनैकेन दारिता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जिसने एक ही बाण से सात विशाल सरोवरों, वृक्षों, पर्वतों, पृथ्वी, पाताल और वहाँ रहने वाले राक्षसों को भेद दिया है, उसे क्या किसी अन्य सहायक की आवश्यकता है?॥8॥
 
Does He who, with a single arrow, has pierced seven huge lakes, trees, mountains, the Earth, the netherworld and the demons living there, need any other helper?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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