श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.36.7 
सीतां प्राप्स्यति धर्मात्मा वधिष्यति च रावणम्।
सहायमात्रेण मया राघव: स्वेन तेजसा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा श्री राम अपने तेज से रावण को मारकर सीता को पुनः प्राप्त करेंगे। मैं तो उनका तुच्छ सहायक मात्र रहूँगा॥ 7॥
 
The righteous Shri Ram will kill Ravana with his own brilliance and regain Sita. I will be just his insignificant helper.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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