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श्लोक 4.36.6  |
क: शक्तस्तस्य देवस्य ख्यातस्य स्वेन कर्मणा।
तादृशं प्रतिकुर्वीत अंशेनापि नृपात्मज॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| ‘राजन्! भगवान् श्री राम अपने कर्मों के कारण सर्वत्र विख्यात हैं। उनकी कृपा का अंशमात्र भी कौन बदला चुका सकता है?॥6॥ |
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| ‘Prince! Lord Shri Ram is famous everywhere for his deeds. Who can repay his kindness even in a fraction of the amount?॥ 6॥ |
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