श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.36.14 
यस्ते प्रभाव: सुग्रीव यच्च ते शौचमीदृशम्।
अर्हस्त्वं कपिराज्यस्य श्रियं भोक्तुमनुत्तमाम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव! आपके प्रभाव और हृदय की शुद्ध भावनाओं के कारण आप वानरराज की श्रेष्ठतम देवी लक्ष्मी को सदैव भोगने के अधिकारी हैं।
 
Sugreeva! Because of your influence and the pure feelings in your heart, you are entitled to always enjoy the best goddess Lakshmi of the monkey kingdom.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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