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श्लोक 4.36.12  |
इति तस्य ब्रुवाणस्य सुग्रीवस्य महात्मन:।
अभवल्लक्ष्मण: प्रीत: प्रेम्णा चेदमुवाच ह॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| महात्मा सुग्रीव के वचन सुनकर लक्ष्मण प्रसन्न हुए और बड़े प्रेम से इस प्रकार बोले-॥12॥ |
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| Lakshmana became pleased at the words of Mahatma Sugreeva and spoke with great love as follows -॥ 12॥ |
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