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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना
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श्लोक 10
श्लोक
4.36.10
अनुयात्रां नरेन्द्रस्य करिष्येऽहं नरर्षभ।
गच्छतो रावणं हन्तुं वैरिणं सपुरस्सरम्॥ १०॥
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! मैं अपने शत्रु रावण का वध करने के लिए प्रमुख सैनिकों के साथ भ्रमण कर रहे महाराज श्री राम का अनुसरण करूँगा॥10॥
Narshrestha! I will follow Maharaj Shri Ram who is traveling with the leading soldiers to kill my enemy Ravana. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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