श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 35: तारा का लक्ष्मण को युक्तियुक्त वचनों द्वारा शान्त करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.35.23 
तव हि मुखमिदं निरीक्ष्य कोपात्
क्षतजसमे नयने निरीक्षमाणा:।
हरिवरवनिता न यान्ति शान्तिं
प्रथमभयस्य हि शङ्किता: स्म सर्वा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारा मुख क्रोध से लाल हो गया है और तुम्हारी आँखें क्रोध से लाल हो गई हैं। यह सब देखकर हम वानरराज की पत्नियाँ शान्ति नहीं पा रही हैं। हम सब पहले भय (वालि के वध के) समान किसी अनर्थ की आशंका से आशंकित हैं॥ 23॥
 
‘Your face is red with anger and your eyes have turned red with rage. Seeing all this, we the wives of the monkey king are unable to find peace. We all are apprehensive of some misfortune similar to the first fear (of the killing of Vali)’॥ 23॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे पञ्चत्रिंश: सर्ग: ॥ ३ ५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें पैंतीसवाँ सर्ग पूरा हु आ॥ ३ ५॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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