श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 35: तारा का लक्ष्मण को युक्तियुक्त वचनों द्वारा शान्त करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.35.22 
ऋक्षकोटिसहस्राणि गोलाङ्गूलशतानि च।
अद्य त्वामुपयास्यन्ति जहि कोपमरिंदम।
कोटॺोऽनेकास्तु काकुत्स्थ कपीनां दीप्ततेजसाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
शत्रु-विनाशक लक्ष्मण! आज दस अरब रीछ, एक अरब वानर तथा उनसे भी अधिक तेजस्वी कई करोड़ वानर आपकी सेवा में उपस्थित होंगे। अतः आप अपना क्रोध त्याग दें॥ 22॥
 
Enemy-destroyer Lakshman! Today, ten billion bears, one billion monkeys and several crore monkeys of even greater brilliance will be present in your service. Therefore, please give up your anger.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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