श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 34: सुग्रीव का लक्ष्मण के पास जाना और लक्ष्मण का उन्हें फटकारना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.34.16 
महाभागेन रामेण पाप: करुणवेदिना।
हरीणां प्रापितो राज्यं त्वं दुरात्मा महात्मना॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाबली भगवान् रामजी परम संत हैं और करुणा से शीघ्र ही द्रवित हो जाते हैं; इसलिए उन्होंने तुम्हारे जैसे पापी और दुष्टबुद्धि वाले को भी वानरराज के सिंहासन पर बैठाया है॥ 16॥
 
The mighty Lord Rama is a supreme saint and is easily moved by compassion; therefore he has made even a sinner and evil-minded person like you sit on the throne of the monkey kingdom.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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