श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 33: लक्ष्मण का सुग्रीव के महल में क्रोधपूर्वक धनुष को टंकारना, सुग्रीव का तारा को उन्हें शान्त करने के लिये भेजना तथा तारा का समझा-बुझाकर उन्हें अन्तःपुर में ले आना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.33.7 
चन्दनागुरुपद्मानां गन्धै: सुरभिगन्धिताम्।
मैरेयाणां मधूनां च सम्मोदितमहापथाम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ चंदन, अगरबत्ती और कमल के फूलों की मनोहर सुगंध फैल रही थी। उस नगर की चौड़ी सड़कें भी मायरे और मधु के आनंद से सुगन्धित हो रही थीं।
 
There was a lovely fragrance of sandalwood, agarbatti and lotus flowers. The wide streets of that city were also fragrant with the joy of Maarey and Madhu. 7.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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