श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 33: लक्ष्मण का सुग्रीव के महल में क्रोधपूर्वक धनुष को टंकारना, सुग्रीव का तारा को उन्हें शान्त करने के लिये भेजना तथा तारा का समझा-बुझाकर उन्हें अन्तःपुर में ले आना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  4.33.60 
आगता हि महावीर्या हरय: कामरूपिण:।
कोटी: शतसहस्राणि नानानगनिवासिन:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
इसी के फलस्वरूप इस समय नाना पर्वतों पर निवास करने वाले, इच्छानुसार रूप धारण करने वाले तथा महान पराक्रम से युक्त लाखों-करोड़ों वानर यहाँ एकत्रित हुए हैं ॥60॥
 
‘As a result of this, millions and crores of monkeys residing on various mountains, capable of assuming any form at will and endowed with great valour, have gathered here at this time. ॥ 60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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