श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 33: लक्ष्मण का सुग्रीव के महल में क्रोधपूर्वक धनुष को टंकारना, सुग्रीव का तारा को उन्हें शान्त करने के लिये भेजना तथा तारा का समझा-बुझाकर उन्हें अन्तःपुर में ले आना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.33.6 
देवगन्धर्वपुत्रैश्च वानरै: कामरूपिभि:।
दिव्यमाल्याम्बरधरै: शोभितां प्रियदर्शनै:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ दिव्य माला और दिव्य वस्त्र धारण करने वाले परम सुन्दर वानर रहते थे, जो देवताओं और गन्धर्वों के पुत्र थे और इच्छानुसार रूप धारण कर सकते थे, और उस नगर की शोभा बढ़ा रहे थे॥6॥
 
There lived the most beautiful monkeys, wearing divine garlands and divine clothes, who were the sons of gods and Gandharvas and who could take any form at will, and enhanced the beauty of that city. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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