श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 33: लक्ष्मण का सुग्रीव के महल में क्रोधपूर्वक धनुष को टंकारना, सुग्रीव का तारा को उन्हें शान्त करने के लिये भेजना तथा तारा का समझा-बुझाकर उन्हें अन्तःपुर में ले आना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  4.33.45 
स मासांश्चतुर: कृत्वा प्रमाणं प्लवगेश्वर:।
व्यतीतांस्तान् मदोदग्रो विहरन् नावबुध्यते॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
वानरराज सुग्रीव ने चार महीने की अवधि निश्चित की थी। वह समय बीत गया, किन्तु वह मधु के नशे में चूर होकर स्त्रियों के साथ क्रीड़ा कर रहा है। उसे समय बीत जाने का पता ही नहीं है। 45.
 
‘The monkey king Sugreeva had fixed a period of four months. They have passed sometime, but he is intoxicated with honey and is playing with women. He is not even aware of the time that has passed. 45.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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