श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 33: लक्ष्मण का सुग्रीव के महल में क्रोधपूर्वक धनुष को टंकारना, सुग्रीव का तारा को उन्हें शान्त करने के लिये भेजना तथा तारा का समझा-बुझाकर उन्हें अन्तःपुर में ले आना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  4.33.36 
त्वद्दर्शने विशुद्धात्मा न स्म कोपं करिष्यति।
नहि स्त्रीषु महात्मान: क्वचित् कुर्वन्ति दारुणम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'उसका हृदय शुद्ध है। वह तुम्हारे सामने क्रोध नहीं करेगा, क्योंकि महापुरुष स्त्रियों के प्रति कभी कठोरता का व्यवहार नहीं करते ॥3 6॥
 
‘His heart is pure. He will not get angry in front of you because great men never behave harshly towards women. ॥ 3 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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