श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 33: लक्ष्मण का सुग्रीव के महल में क्रोधपूर्वक धनुष को टंकारना, सुग्रीव का तारा को उन्हें शान्त करने के लिये भेजना तथा तारा का समझा-बुझाकर उन्हें अन्तःपुर में ले आना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.33.3 
नि:श्वसन्तं तु तं दृष्ट्वा क्रुद्धं दशरथात्मजम्।
बभूवुर्हरयस्त्रस्ता न चैनं पर्यवारयन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
दशरथपुत्र लक्ष्मण को क्रोध में गहरी साँसें लेते देख, सब वानर अत्यन्त भयभीत हो गए, इसलिए वे उन्हें चारों ओर से घेरकर उनके साथ नहीं चल सके॥3॥
 
Seeing Lakshmana, the son of Dasharatha, taking deep breaths in anger, all the monkeys became very frightened. That is why they could not surround him from all sides and walk along with him.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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