श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 33: लक्ष्मण का सुग्रीव के महल में क्रोधपूर्वक धनुष को टंकारना, सुग्रीव का तारा को उन्हें शान्त करने के लिये भेजना तथा तारा का समझा-बुझाकर उन्हें अन्तःपुर में ले आना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.33.22 
बह्वीश्च विविधाकारा रूपयौवनगर्विता:।
स्त्रिय: सुग्रीवभवने ददर्श स महाबल:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाबली लक्ष्मण ने सुग्रीव के हरम में अनेक रूप-रंग वाली सुन्दर स्त्रियाँ देखीं, जो अपने सौन्दर्य और यौवन पर गर्व से भरी हुई थीं।
 
Mighty Lakshmana saw in Sugreeva's harem many beautiful women of various looks and colours, who were full of pride of their beauty and youth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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