श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 33: लक्ष्मण का सुग्रीव के महल में क्रोधपूर्वक धनुष को टंकारना, सुग्रीव का तारा को उन्हें शान्त करने के लिये भेजना तथा तारा का समझा-बुझाकर उन्हें अन्तःपुर में ले आना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.33.18 
सुग्रीवस्य गृहं रम्यं प्रविवेश महाबल:।
अवार्यमाण: सौमित्रिर्महाभ्रमिव भास्कर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रा के पराक्रमी पुत्र लक्ष्मण ने सुग्रीव के उस सुन्दर महल में प्रवेश किया। ऐसा लगा मानो सूर्यदेव विशाल बादल के भीतर प्रवेश कर गए हों। उस समय उन्हें किसी ने नहीं रोका॥18॥
 
The mighty son of Sumitra, Lakshman entered that beautiful palace of Sugreeva. It was as if the Sun God had entered inside a huge cloud. At that time no one stopped him.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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