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ramayan 4.32.5: लक्ष्मण के क्रोध के विषय में आप सब लोग पहले धीरे-धीरे और कुशलता से उनकी मानसिक स्थिति का क्रमबद्ध तरीके से पता लगाएँ, जिससे उनके क्रोध का कारण ठीक-ठीक जाना जा सके। 5॥   |   ramayan सर्ग 4.32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.32.5 
अत्र तावद् यथाबुद्धि: सर्वैरेव यथाविधि।
भावस्य निश्चयस्तावद् विज्ञेयो निपुणं शनै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के क्रोध के विषय में आप सब लोग पहले धीरे-धीरे और कुशलता से उनकी मानसिक स्थिति का क्रमबद्ध तरीके से पता लगाएँ, जिससे उनके क्रोध का कारण ठीक-ठीक जाना जा सके। 5॥
 
Regarding Lakshman's anger, first of all you all should slowly and skillfully determine his mental state in a systematic way, so that the reason behind his anger can be accurately known. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)