Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.32.20: 'जिस व्यक्ति को हाथ जोड़कर प्रसन्न करना आवश्यक हो, उसे क्रोधित करना कभी उचित नहीं है। विशेषकर उस व्यक्ति को, जो अपने मित्र के पूर्व उपकारों को स्मरण रखता हो और उसके प्रति कृतज्ञ हो, इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए।'   |   ramayan सर्ग 4.32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.32.20 
न स क्षम: कोपयितुं य: प्रसाद्य: पुनर्भवेत्।
पूर्वोपकारं स्मरता कृतज्ञेन विशेषत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'जिस व्यक्ति को हाथ जोड़कर प्रसन्न करना आवश्यक हो, उसे क्रोधित करना कभी उचित नहीं है। विशेषकर उस व्यक्ति को, जो अपने मित्र के पूर्व उपकारों को स्मरण रखता हो और उसके प्रति कृतज्ञ हो, इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए।'
 
‘It is never appropriate to anger a person who needs to be appeased with folded hands. Especially a person who remembers the earlier favours of his friend and is grateful should pay more attention to this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)