श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.32.18 
नियुक्तैर्मन्त्रिभिर्वाच्यो ह्यवश्यं पार्थिवो हितम्।
इत एव भयं त्यक्त्वा ब्रवीम्यवधृतं वच:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राज्य के कल्याण के लिए नियुक्त मंत्रियों का कर्तव्य है कि वे राजा को उसके हित की बातें बताएँ। अतः मैं बिना किसी भय के आपसे अपना दृढ़ मत कह रहा हूँ॥18॥
 
‘It is the duty of the ministers appointed for the welfare of the state to inform the king about matters that are in his interest. Therefore, without any fear, I am telling you my firm opinion.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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