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श्लोक 4.32.14  |
निर्मलग्रहनक्षत्रा द्यौ: प्रणष्टबलाहका।
प्रसन्नाश्च दिश: सर्वा: सरितश्च सरांसि च॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| अब आसमान में बादल नहीं हैं। ग्रह-नक्षत्र साफ़ दिखाई दे रहे हैं। चारों तरफ़ रोशनी फैल गई है और नदियों-तालाबों का पानी बिल्कुल साफ़ हो गया है। |
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| ‘There are no clouds in the sky now. The planets and stars appear clear. Light has spread in all directions and the water of rivers and lakes has become absolutely clean. |
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