श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.32.1 
अङ्गदस्य वच: श्रुत्वा सुग्रीव: सचिवै: सह।
लक्ष्मणं कुपितं श्रुत्वा मुमोचासनमात्मवान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
मन्त्रियों सहित अंगद के वचन सुनकर और लक्ष्मण के क्रोधित होने का समाचार पाकर मन को वश में रखने वाले सुग्रीव अपना आसन छोड़कर खड़े हो गए॥1॥
 
On hearing the words of Angada along with his ministers and on receiving the news of Lakshmana being angry, Sugreeva, who had kept his mind under control, left his seat and stood up. ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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