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ramayan 4.31.6: सुमित्रानन्दन! आप जैसे महापुरुष को संसार में ऐसा निषिद्ध आचरण (मित्र का वध) नहीं करना चाहिए। जो विवेकपूर्वक क्रोध को मार डालता है, वह समस्त वीरों में श्रेष्ठ है। 6॥   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.31.6 
नहि वै त्वद्विधो लोके पापमेवं समाचरेत्।
कोपमार्येण यो हन्ति स वीर: पुरुषोत्तम:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानन्दन! आप जैसे महापुरुष को संसार में ऐसा निषिद्ध आचरण (मित्र का वध) नहीं करना चाहिए। जो विवेकपूर्वक क्रोध को मार डालता है, वह समस्त वीरों में श्रेष्ठ है। 6॥
 
Sumitranandan! A great man like you should not perform such prohibited conduct in the world (killing a friend). He who kills his anger with good discretion is the best among all brave men. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)