Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.31.48: हे राजन! हे पापरहित वानरराज! लक्ष्मण ने तारादेवी के इस प्रिय पुत्र अंगद को बड़ी शीघ्रता से आपके पास भेजा है॥48॥   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  4.31.48 
अयं च तनयो राजंस्ताराया दयितोऽङ्गद:।
लक्ष्मणेन सकाशं ते प्रेषितस्त्वरयानघ॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हे पापरहित वानरराज! लक्ष्मण ने तारादेवी के इस प्रिय पुत्र अंगद को बड़ी शीघ्रता से आपके पास भेजा है॥48॥
 
King! Sinless monkey king! Lakshmana has sent this beloved son of Taradevi, Angad, to you with great haste. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)