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ramayan 4.31.47: श्री राम की आज्ञा ही जिनका सारथी है और कर्तव्य का निश्चय ही जिनका रथ है, वे श्री राम की आज्ञा से ही यहाँ आये हैं।   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  4.31.47 
स एष राघवभ्राता लक्ष्मणो वाक्यसारथि:।
व्यवसायरथ: प्राप्तस्तस्य रामस्य शासनात्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
श्री राम की आज्ञा ही जिनका सारथी है और कर्तव्य का निश्चय ही जिनका रथ है, वे श्री राम की आज्ञा से ही यहाँ आये हैं।
 
Lakshmana, whose charioteer is the command of Shri Rama and whose chariot is the determination of duty, has come here by the order of Shri Rama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)