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ramayan 4.31.41: वानरों की भयंकर गर्जना से वानरराज सुग्रीव की नींद खुल गई। उस समय उनकी आँखें मद के कारण लाल और बेचैन थीं। उनका मन भी अस्वस्थ था। उनके गले में फूलों की एक सुंदर माला शोभायमान थी। 41.   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  4.31.41 
तेन शब्देन महता प्रत्यबुध्यत वानर:।
मदविह्वलताम्राक्षो व्याकुल: स्रग्विभूषण:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
वानरों की भयंकर गर्जना से वानरराज सुग्रीव की नींद खुल गई। उस समय उनकी आँखें मद के कारण लाल और बेचैन थीं। उनका मन भी अस्वस्थ था। उनके गले में फूलों की एक सुंदर माला शोभायमान थी। 41.
 
The terrible roar of the monkeys woke up the King of the Apes Sugreeva from his sleep. At that time his eyes were restless and red due to intoxication. His mind was also not healthy. A beautiful garland of flowers was adorning his neck. 41.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)