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ramayan 4.31.38: परन्तु सुग्रीव तो मदमस्त और काम-मोहित होकर लेटा हुआ था। निद्रा ने उस पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया था। इसलिए वह जाग नहीं सका। 38।   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  4.31.38 
स निद्राक्लान्तसंवीतो वानरो न विबुद्धवान्।
बभूव मदमत्तश्च मदनेन च मोहित:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु सुग्रीव तो मदमस्त और काम-मोहित होकर लेटा हुआ था। निद्रा ने उस पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया था। इसलिए वह जाग नहीं सका। 38।
 
But Sugreeva was lying there intoxicated and infatuated with lust. Sleep had taken complete control over him. That is why he could not wake up. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)