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ramayan 4.31.3: सुग्रीव अपनी बुद्धि खो बैठा है, इसीलिए विषय-भोगों में आसक्त हो गया है। राज्य आदि के रूप में जो उपकार उसे प्राप्त हुआ है, उसका बदला चुकाने की उसकी कोई इच्छा नहीं है। अतः अब उसे भी मरकर अपने बड़े भाई वीरवर बालि से मिल जाना चाहिए। ऐसे गुणहीन व्यक्ति को राज्य नहीं देना चाहिए॥3॥   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.31.3 
मतिक्षयाद् ग्राम्यसुखेषु सक्त-
स्तव प्रसादात् प्रतिकारबुद्धि:।
हतोऽग्रजं पश्यतु वीरवालिनं
न राज्यमेवं विगुणस्य देयम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव अपनी बुद्धि खो बैठा है, इसीलिए विषय-भोगों में आसक्त हो गया है। राज्य आदि के रूप में जो उपकार उसे प्राप्त हुआ है, उसका बदला चुकाने की उसकी कोई इच्छा नहीं है। अतः अब उसे भी मरकर अपने बड़े भाई वीरवर बालि से मिल जाना चाहिए। ऐसे गुणहीन व्यक्ति को राज्य नहीं देना चाहिए॥3॥
 
‘Sugreeva has lost his wisdom, that is why he has become addicted to sensual pleasures. He has no intention of repaying the favours of you which he has received in the form of kingdom etc. So now he should also die and meet his elder brother Veervar Vali. Such a person without qualities should not be given the kingdom.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)