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ramayan 4.31.29: उसकी साँसें तेज़ और लंबी होने लगीं। उसकी आँखें क्रोध से लाल हो गईं। उस समय नरसिंह लक्ष्मण धुएँ से भरी हुई अग्नि के समान प्रकट हुए।   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.31.29 
स दीर्घोष्णमहोच्छ्वास: कोपसंरक्तलोचन:।
बभूव नरशार्दूल: सधूम इव पावक:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उसकी साँसें तेज़ और लंबी होने लगीं। उसकी आँखें क्रोध से लाल हो गईं। उस समय नरसिंह लक्ष्मण धुएँ से भरी हुई अग्नि के समान प्रकट हुए।
 
He started breathing hotter and longer. His eyes became red with anger. At that time, the lion of men, Lakshmana, appeared like a smoke-filled fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)