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ramayan 4.31.27: तत्पश्चात् वे सभी महाबली वानर नगर की चारदीवारी और खाई के भीतर से निकलकर सामने प्रकट रूप में खड़े हो गये।   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.31.27 
ततस्ते हरय: सर्वे प्राकारपरिखान्तरात्।
निष्क्रम्योदग्रसत्त्वास्तु तस्थुराविष्कृतं तदा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे सभी महाबली वानर नगर की चारदीवारी और खाई के भीतर से निकलकर सामने प्रकट रूप में खड़े हो गये।
 
Thereafter all those mighty monkeys came out from within the boundary walls and moat of the city and stood in front in visible form. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)