Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.31.26: हाथों में वृक्ष लिए हुए उन महाबली वानरों से भरी हुई वह किष्किन्धपुरी अत्यन्त दुर्भेद्य प्रतीत हो रही थी। लक्ष्मण ने क्रोधपूर्वक उस नगरी की ओर देखा॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.31.26 
ततस्तै: कपिभिर्व्याप्तां द्रुमहस्तैर्महाबलै:।
अपश्यल्लक्ष्मण: क्रुद्ध: किष्किन्धां तां दुरासदाम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हाथों में वृक्ष लिए हुए उन महाबली वानरों से भरी हुई वह किष्किन्धपुरी अत्यन्त दुर्भेद्य प्रतीत हो रही थी। लक्ष्मण ने क्रोधपूर्वक उस नगरी की ओर देखा॥ 26॥
 
Kishkindapuri, infested with those mighty monkeys with trees in their hands, appeared extremely impregnable. Lakshmana looked towards that city in anger.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)