Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.31.2: आर्य! सुग्रीव वानर है, वह सज्जन पुरुषों के योग्य आचार में दृढ़ नहीं रह सकेगा। सुग्रीव इस बात को भी स्वीकार नहीं करता कि अग्नि को साक्षी मानकर श्री रघुनाथजी से मित्रता करने के पुण्यकर्म के कारण उसे राज्य-सुख निर्विघ्न प्राप्त हुआ है। अतः वह वानरों के राज्य-धन का पालन और उपभोग नहीं कर सकेगा; क्योंकि उसकी बुद्धि मित्रता के कर्तव्य का पालन करने के लिए अधिक अग्रसर नहीं हो रही है॥ 2॥ | ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न वानर: स्थास्यति साधुवृत्ते
न मन्यते कर्मफलानुषङ्गान्।
न भोक्ष्यते वानरराज्यलक्ष्मीं
तथा हि नातिक्रमतेऽस्य बुद्धि:॥ २॥
अनुवाद
आर्य! सुग्रीव वानर है, वह सज्जन पुरुषों के योग्य आचार में दृढ़ नहीं रह सकेगा। सुग्रीव इस बात को भी स्वीकार नहीं करता कि अग्नि को साक्षी मानकर श्री रघुनाथजी से मित्रता करने के पुण्यकर्म के कारण उसे राज्य-सुख निर्विघ्न प्राप्त हुआ है। अतः वह वानरों के राज्य-धन का पालन और उपभोग नहीं कर सकेगा; क्योंकि उसकी बुद्धि मित्रता के कर्तव्य का पालन करने के लिए अधिक अग्रसर नहीं हो रही है॥ 2॥
‘Arya! Sugreeva is a monkey, he will not be able to remain steadfast in the moral conduct that is appropriate for noble men. Sugreeva does not even accept the fact that he has received the pleasures of the kingdom without any hindrances because of the good deed of establishing friendship with Shri Raghunathji by taking fire as a witness. Therefore, he will not be able to maintain and enjoy the kingdom-wealth of the monkeys; because his intellect is not moving forward much to follow the duty of friendship.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥