Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.31.17: उस समय लक्ष्मण के होंठ सुग्रीव के प्रति क्रोध से काँप रहे थे। उन्होंने किष्किन्धा के निकट अनेक भयंकर वानरों को देखा जो नगर के बाहर विचरण कर रहे थे।   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.31.17 
रोषात् प्रस्फुरमाणोष्ठ: सुग्रीवं प्रति लक्ष्मण:।
ददर्श वानरान् भीमान् किष्किन्धायां बहिश्चरान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस समय लक्ष्मण के होंठ सुग्रीव के प्रति क्रोध से काँप रहे थे। उन्होंने किष्किन्धा के निकट अनेक भयंकर वानरों को देखा जो नगर के बाहर विचरण कर रहे थे।
 
At that time Lakshman's lips were trembling with anger towards Sugreeva. He saw many fierce monkeys near Kishkinda who were roaming outside the city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)