Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.31.14: उसका वेग इतना अधिक था कि वह उसी वेग से रास्ते में आने वाले साल, ताल और अश्वकर्ण वृक्षों को गिरा देता था तथा पर्वत शिखरों और अन्य वृक्षों को भी उठाकर फेंक देता था॥ 14॥ | ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसका वेग इतना अधिक था कि वह उसी वेग से रास्ते में आने वाले साल, ताल और अश्वकर्ण वृक्षों को गिरा देता था तथा पर्वत शिखरों और अन्य वृक्षों को भी उठाकर फेंक देता था॥ 14॥
His speed was so great that with the same speed he would force down the Sal, Tal and Ashwakarna trees that he came across on his way and would also pick up mountain peaks and other trees and throw them away.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥