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ramayan 4.30.85: जब मनुष्यों की वृद्धि करने वाले भयंकर एवं तेजस्वी लक्ष्मण ने अपने बड़े भाई को दुःखी, क्रोध में भरे हुए तथा बहुत अधिक बकते हुए देखा, तब उन्होंने वानरराज सुग्रीव के प्रति कठोर रवैया अपनाया।   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  4.30.85 
स पूर्वजं तीव्रविवृद्धकोपं
लालप्यमानं प्रसमीक्ष्य दीनम्।
चकार तीव्रां मतिमुग्रतेजा
हरीश्वरे मानववंशवर्धन:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
जब मनुष्यों की वृद्धि करने वाले भयंकर एवं तेजस्वी लक्ष्मण ने अपने बड़े भाई को दुःखी, क्रोध में भरे हुए तथा बहुत अधिक बकते हुए देखा, तब उन्होंने वानरराज सुग्रीव के प्रति कठोर रवैया अपनाया।
 
When the fierce and illustrious Lakshmana, who was increasing the human race, saw his elder brother sad, full of anger and talking a lot, then he adopted a harsh attitude towards the monkey king Sugreeva. 85.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे त्रिंश: सर्ग: ॥ ३ ०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ३ ०॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)