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ramayan 4.30.77: हे शत्रु नगर को जीतने वाले लक्ष्मण! जिनके लिए यह सब मित्रता आदि का आयोजन किया गया था, वही वानरराज सुग्रीव सीता को खोजने का वचन भूल गए हैं - उन्हें याद नहीं आ रहा; क्योंकि उनका अपना कार्य पूरा हो चुका है।   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.30.77 
यदर्थमयमारम्भ: कृत: परपुरंजय।
समयं नाभिजानाति कृतार्थ: प्लवगेश्वर:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रु नगर को जीतने वाले लक्ष्मण! जिनके लिए यह सब मित्रता आदि का आयोजन किया गया था, वही वानरराज सुग्रीव सीता को खोजने का वचन भूल गए हैं - उन्हें याद नहीं आ रहा; क्योंकि उनका अपना कार्य पूरा हो चुका है।
 
Lakshmana, conqueror of the enemy's city! For whose sake all this friendship etc. was arranged, the monkey king Sugreeva has forgotten that promise of finding Sita - he is not remembering it; because his own task has been accomplished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)