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ramayan 4.30.72: जो अपने द्वारा कहे गए सभी वचनों को अच्छा या बुरा समझकर सत्य की रक्षा के उद्देश्य से उनका पालन करता है, वह समस्त वीर पुरुषों में श्रेष्ठ माना जाता है ॥ 72॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  4.30.72 
शुभं वा यदि वा पापं यो हि वाक्यमुदीरितम्।
सत्येन परिगृह्णाति स वीर: पुरुषोत्तम:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
जो अपने द्वारा कहे गए सभी वचनों को अच्छा या बुरा समझकर सत्य की रक्षा के उद्देश्य से उनका पालन करता है, वह समस्त वीर पुरुषों में श्रेष्ठ माना जाता है ॥ 72॥
 
He who considers all the words uttered by him as good or bad and follows them with the objective of protecting the truth is considered to be the best among all brave men.॥ 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)